अजीत मिश्रा (खोजी)
🚨भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा सरकारी बजट: तरेता में खड़ंजा मरम्मत के नाम पर लाखों का ‘खेला’🚨
⭐”साऊँघाट विकास खंड में भ्रष्टाचार की गूंज: क्या तरेता के ‘ईंट-मिट्टी’ खेल की जांच करेगा प्रशासन?”
⭐”खोजी पड़ताल: तरेता ग्राम पंचायत में खड़ंजा मरम्मत के नाम पर सरकारी धन की खुली डकैती”
⭐”ग्रामीणों का हल्लाबोल: तरेता में खड़ंजा मरम्मत के नाम पर हुआ भारी गोलमाल, जांच की उठी मांग”
बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
बस्ती।। जनपद के साऊँघाट विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तरेता से विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ खड़ंजा मरम्मत के नाम पर कागजों के घोड़े दौड़ाकर सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप लगा है। खोजी पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे सीधे तौर पर ग्राम प्रधान और सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।
💫कागजों पर चमकी सड़कें, धरातल पर धूल
पूरा मामला पिच रोड से नहर की पुलिया तक किए गए खड़ंजा मरम्मत कार्य से जुड़ा है। कार्ययोजना के दस्तावेजों के अनुसार, केवल ईंट क्रय मद में 1,08,979 रुपये का भारी-भरकम खर्च दिखाया गया है। यदि वर्तमान बाजार दर और सरकारी मानकों को देखें, तो इस धनराशि में कम से कम 13 हजार नई ईंटें लगनी चाहिए थीं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मौके पर नई ईंटों का कहीं अता-पता नहीं है।
💫मिट्टी के नाम पर ‘मिट्टी’ हुआ सरकारी खजाना
घोटाले की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कार्ययोजना में खड़ंजे के नीचे और पटरी भराई के लिए सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी का खर्च भी दर्शाया गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर इतनी मिट्टी कभी डाली ही नहीं गई। सवाल यह उठता है कि आखिर वो मिट्टी गई कहाँ? या फिर बिना काम किए ही भुगतान के लिए फर्जी मस्टररोल और बिल तैयार किए गए?
💫ग्रामीणों में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से ग्राम प्रधान और संबंधित सचिव पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे को विकास के नाम पर लूटा जा रहा है।
“सरकारी धन की इस तरह लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। खड़ंजे की मरम्मत सिर्फ कागजों पर हुई है, धरातल पर स्थिति जस की तस है।” — स्थानीय निवासी
💫मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:
🔥₹1.08 लाख की ईंटों की भौतिक उपलब्धता कहाँ है?
🔥सैकड़ों ट्रॉली मिट्टी की ढुलाई का सत्यापन किसके द्वारा किया गया?
🔥बिना मानक के कार्य होने पर भुगतान की अनुमति कैसे मिली?
फिलहाल, ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से इस मामले की स्थलीय जांच (Spot Verification) और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘मिट्टी और ईंट’ के खेल की कितनी गहराई से जांच करता है।
रिपोर्ट: मंडल ब्यूरो चीफ, बस्ती












